: आज़ादी के बाद दिल्ली के मैटकॉफ हाउस में होती थी आईएएस की ट्रेनिंग, 1959 में मसूरी में किया गया था शिफ्ट – भारद्वाज
: पूर्व प्रधानमंत्री स्व० इंदिरा गांधी ने 1974 ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व० लाल बहादुर शास्त्री के नाम से किया था अकादमी का नामकरण।
मसूरी – देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री, गृहमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को स्वतंत्र भारत में लगभग 562 देशी रियासतों के एकीकरण करने में अहम योगदान रहा है। 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में जन्मे पटेल एक कुशल राजनीतिज्ञ, अधिवक्ता होने के साथ-साथ अपने कड़े फैसले लेने के लिए आज भी याद किए जाते हैं।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि सरदार पटेल ने गृहमंत्री रहते हुए ब्रिटिश काल की केंद्रीय सेवा “इंडियन सिविल सर्विस” (आईसीएस) को “इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस” (आईएस) का नाम दिया था। भारद्वाज बताते है कि सरदार पटेल स्वतंत्रता आंदोलन के समय में कई बार मसूरी आए व साल 1946 में वह अन्य कांग्रेसी नेताओं के साथ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कार्यमंत्रणा के लिए बिरला हाउस में रुके थे जहां आंदोलन को लेकर नहीं रणनीति पर विचार विचार विमर्श किया गया था।
बकौल भारद्वाज मसूरी के युवाओं को सिविल सर्विस में अपना कैरियर बनाने के लिए एलबीएस अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर देश के प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे स्थानीय आईएएस से प्रेरणा लेनी चाहिए।
