एमपीजी कॉलेज मसूरी में सहकारिता एवं उद्यमिता पर कार्यशाला आयोजित।

: विद्यार्थियों को ‘जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनने’ के लिए किया प्रेरित।

मसूरी – एम पी जी कॉलेज, मसूरी में आज सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से सहकारिता एवं उद्यमिता विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट, देहरादून के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अतुल भारद्वाज द्वारा संचालित किया गया। यह महाविद्यालय में उद्यमिता के क्षेत्र में आयोजित पहली कार्यशाला थी, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सहकारिता की अवधारणा, स्वरोजगार के अवसरों तथा सहकारी संस्थाओं के माध्यम से रोजगार सृजन के प्रति जागरूक करना था।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए डॉ. अतुल भारद्वाज ने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि सहकारिता एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा सामूहिक प्रयासों से रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं तथा आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

कार्यशाला के दौरान उन्होंने लिज्जत पापड़ की सफलता की कहानी के माध्यम से सहकारिता की शक्ति को समझाया। उन्होंने बताया कि सात महिलाओं द्वारा मात्र 80 रुपये से शुरू किया गया यह छोटा-सा प्रयास आज एक बड़े व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है, जिसका वार्षिक टर्नओवर लगभग 1,600 करोड़ रुपये बताया जाता है। इस उदाहरण के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया गया कि सामूहिक प्रयास, आत्मविश्वास, मेहनत और सहयोग से छोटे स्तर पर शुरू किया गया कार्य भी बड़े उद्यम का रूप ले सकता है।

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि सहकारिता की शुरुआत मुख्य रूप से कृषि एवं प्राथमिक कृषि उत्पादों से हुई थी, लेकिन वर्तमान समय में सहकारी संस्थाएं विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न सहकारी संस्थाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि सहकारिता के माध्यम से उत्पादन, विपणन, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

इस अवसर पर सहकारिता के नवीनतम उदाहरण के रूप में भारत टैक्सी का उल्लेख किया गया, जो सहकारी मॉडल पर आधारित एआई-संचालित टैक्सी सुविधा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक और सहकारिता का समन्वय करके नए प्रकार के व्यवसाय एवं रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि सहकारिता का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता, समान अवसर और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। इस प्रकार के उद्यम पहाड़ी क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या को कम करने तथा पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय संसाधनों एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर विकसित करना अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।

डॉ. भारद्वाज ने सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनके लोकतांत्रिक स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं में सदस्यों की सहभागिता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। सहकारिता का मूल उद्देश्य सभी सदस्यों को साथ लेकर चलना तथा आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि सहकारी संस्थाओं की अवधारणा भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही विद्यमान रही है। सामूहिक सहयोग, सहभागिता और एक-दूसरे की सहायता करने की परंपरा भारतीय समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। आधुनिक सहकारी संस्थाएं इसी भावना को संगठित रूप प्रदान करती हैं।

कार्यशाला में महाविद्यालय के लगभग 30–35 विद्यार्थियों तथा घनानंद इंटर कॉलेज के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के लगभग 60 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। घनानंद इंटर कॉलेज के दो शिक्षकों ने भी कार्यशाला में सहभागिता की। इसके अतिरिक्त एम पी जी कॉलेज के उपस्थित समस्त स्टाफ ने भी इस कार्यक्रम का लाभ उठाया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सहकारिता के माध्यम से उद्यम स्थापित करने की संभावनाओं से परिचित कराया गया। यह कार्यशाला विद्यार्थियों को उद्यमिता के प्रति जागरूक करने तथा भविष्य में रोजगार के नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो शालिनी गुप्ता ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, आयोजकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उन्हें पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार के नए विकल्पों की जानकारी प्राप्त होती है।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के लिए सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था भी की गई।

Vimal Nawani
Vimal Nawani

CHIEF EDITOR